गुस्सा ज्यादा आता है तो यह कहानी सुन लो | If You Get Angry Then Listen to This Story

 यदि आप सही है तो गुस्सा करने की जरूरत नहीं है और यदि आप गलत है तो आपको गुस्सा करने का कोई हक नहीं है 


(If you are right then there is no need to get angry and if you are wrong then you have no right to get angry)

एक छोटी सी कहानी


यह कहानी सिकंदर महान की जिसके बारे में उनके लोग कहते थे उन्होंने आज ही दुनिया जीत ली है लेकिन सच यह है कि उन्होंने सिर्फ 15% दुनिया ही जीती थी एक के बाद एक देशों को हराते हुए सिकंदर की सेना आगे बढ़ते हुए नॉर्थ इंडिया तक आ पहुंची थी और हमारे यहां राजा पोरस के साथ जब युद्ध हुआ  जब सिकंदर ने उनसे दोस्ती कर ली उन्हें समझ आ गया कि भारत का प्रक्रम कितना ज्यादा है 



सिकंदर की सेना की लगातार ये डिमांड थी कि अब वापस लौट  जाए वह कब तक युद्ध करते रहेंगे वह युद्ध कर कर के थक चुके थे सिकंदर ने अपनी सेना की बातों को मान लिया और उसने वापस जाने का फैसला ले लिया लेकिन सिकंदर जब भारत से लौटते वक्त भारत के सबसे ज्ञानी पुरुष सबसे ज्ञानी व्यक्ति को अपने साथ में ले जाना चाहता था उसे किसने बताया था कि एक महान संत हैं उनके पास चले जाओ अगर उन्होंने तुम्हारी बात मान ली और वह तुम्हारे साथ तुम्हारे देश चले जाएंगे लेकिन ऐसा लगता नहीं है 

फिर सिकंदर ने कहा अरे मैंने बड़े बड़ों को हरा दिया है फिर यह बाबा जी क्या चीज है बाबा जी के दर्शन के लिए वहां पहुंचा बाबाजी निर्वस्त्र ध्यान में बैठे हुए थे बहुत देर तक सिकंदर इंतजार करता रहा जब बाबा जी का ध्यान समाप्त हुआ ध्यान टूटा  तब हो अपनी तपस्या से बाहर आने के बाद में सिकंदर को दर्शन देने के लिए कुटिया से बाहर निकले और जैसे ही कुटिया से बाहर निकले सिकंदर की सेना ने नारे लगाना शुरू कर दिया सिकंदर महान की जय हो सिकंदर महान की जय हो बाबा जी यह सब देख कर के मुस्कुराए कुछ नहीं बोले और वही कुटिया के बाहर एक पेड़ था वहीं बैठ गए आसन लगाकर  सिकंदर उसके पास गया और जाकर के भोला बाबा जी

मेरा नाम सिकंदर है सिकंदर महान और मैंने ना जाने कितने देशों को ना जाने कितने राजाओं को हरा दिया है मेरी सेना युद्ध कर कर के थक गई है अब हम वापस जा रहे हैं लेकिन वापस जाते वक्त मैं भारत से एक ज्ञानी व्यक्ति को साथ ले जाना चाहता हूं उन लोगों ने बताया कि आप से ज्ञानी हूं यहां कोई नहीं है इसलिए आप हमारे साथ चलिए बाबा जी ने मना कर दिया कि नहीं मैं यहां तपस्या करता हूं ‌ यह छोटी सी कुटिया मेरी कुटिया बस इसके अलावा कहीं नहीं जाना 

सिकंदर ने फिर से कहा कि बाबा जी मेरी बात मानिए मेरे साथ चलिए मुझसे बहस मत करिए मैंने बड़े बड़ों को हरा दिया है और आप हमारे साथ चलेंगे तो हमारे लोगों का भी थोड़ा ज्ञान वर्धन होगा उनको भी थोड़ा ज्ञान मिल जाएगा हमारे साथ चलिए बाबा जी ने फिर से मना कर दिया कि नहीं मैं यह जगह छोड़कर जा नहीं सकता और सिकंदर को गुस्सा आ गया सिकंदर ने अपनी तलवार निकाली और बाबा जी की गर्दन पर टिका दी और उसके बाद बोला आप मरना चाहते हैं या मेरे साथ चलना चाहते हैं


बाबा जी ने कहा कि मुझे मारना चाहते हो तो तुम मुझे मार दो लेकिन मैं कहीं नहीं जाने वाला और तुम्हारे बारे में बस एक बात कहना चाहता हूं कि यह महान बोलना बुलवाना बंद कर दो तुम महान नहीं हो तुम तो मेरे गुलाम की भी गुलाम हो जहां बाबा जी ने यह कहा सिकंदर चौक गया आश्चर्य में पड़ गया उसने पूछा कि मतलब गुलाम का गुलाम क्या आज तक किसी ने मुझे गुलाम नहीं कहा मैं महान हूं और कौन सा गुलाम जिसका मैं गुलाम हूं 

और बाबा जी ने कहा कि मेरा गुलाम है गुस्सा जब मैं चाहता हूं तभी वह गुस्सा मुझे आता है लेकिन तुम तो उस गुस्से के गुलाम हो तुम तो मेरे गुलाम के भी गुलाम हो तुमने पूरी दुनिया जीत ली ऐसा तुम कहते हो लेकिन तुमने आज तक अपने गुस्से को काबू  नहीं कर पाए आज तक अपने गुस्से पर विजय नहीं कर पाए अगर शायद यही बात तुम प्यार से कुछ कहते तो शायद कुछ और बात होती लेकिन तुम अपने अहंकार में डूबे हुए हो उस दिन सिकंदर अपनी सैनिकों के साथ बहुत बड़ी बात सीख करके अपने देश वापस लौट गया 



इस कहानी से यह सीख मिलती है कि


हमें जिंदगी में बहुत ज्यादा जरूरी है अपने गुस्से पर कंट्रोल करना क्योंकि चाहे आप हजार बातें किसी के लिए अच्छी कहें लेकिन आप एक बात गुस्से में गलत कह देंगे आपका रिश्ता आपकी दोस्ती आपका प्यार वही टूट जाएगा इसीलिए गुस्से से बची है ‌ यदि आप सही हैं तो गुस्सा करने की जरूरत नहीं है अगर आप गलत है तो आपको कोई हक नहीं है ‌

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