बड़ों का सम्मान करें | Respect The Elders Motivational Story

की हार की बाजी पिता हमेशा ही मुस्कुराया, शतरंज की उस जीत को मैं अब समझ पाया

यह कहानी है नई नवेली बहू की जो जैसे ही ससुराल में गई उसे अपनी सास से चिढ़ होने लगे जैसा कि बाकी बहुओं को लगता है कि सास हमेशा टोकती है फालतू में बातें करती हैं फालतू में ज्ञान देती है जिसकी रिक्वायरमेंट नहीं है इस बहू को भी यही लगने लगा इसने अपने पति से कहा कि क्यों ना हम इस घर को छोड़कर एक फ्लैट लेकर अलग रहने लगे अलग जगह रहने लगेंगे पति को लगा कि यह तो गलत हो रहा है

पति ने अपनी वाइफ को समझाया कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता मां सही कहती हैं पति भी मां का पक्ष लेने लगा तो बहू को और गुस्सा आने लगा एक दिन वह छोड़ कर के गुस्सा हो कर के अपने मायके चली गई उसके पिता जी वैद्य थे आयुर्वेद के दवाइयों का उन्हें ज्ञान था तो जा कर के कहा कि पापा जी ऐसी कोई दवाई दे दीजिए ऐसी कोई जहर की पुड़िया दीजिए मेरी सासू मां हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाए और मुझे उनसे छुटकारा मिल जाए मैं नहीं चाहती हूं कि मैं अपनी सासू मां के साथ रहूं मैं उनसे पीछा छुड़ाना चाहती हूं 

तो पिताजी ने कहा कि मैं तुम्हें जहर की पुड़िया कैसी दूं तुम्हें जहर दूंगा तो तुम जाकर के सासू मां को जहर दोगी उनकी मौत हो जाएगी पुलिस आएगी तुम्हें पकड़े गी तुम तक जहर पहुंचाने के आरोप में पुलिस मुझे भी पकड़ी गई हमारा पूरा परिवार तबाह हो जाएगा तो उस बहू ने कहा कि फिर क्या करें पापा आप ही बताइए क्या करें तो पिताजी ने कहा कि दूसरी दवा देता हूं यह दवाई धीरे-धीरे असर करेगी 

6 महीने तक रोजाना इसको खाने में मिलाकर के देना तुम्हारी सासू मां की तबीयत खराब होने लगेगी वह कमजोर होने लगेगी और 6 महीने के बाद जब उनकी डेथ हो जाएगी यानी की मृत्यु हो जाएगी तो किसी को मालूम भी नहीं चलेगा कि क्या रीज़न था बस तुम इस दौरान अपने व्यवहार को थोड़ा सा चेंज कर लेना उनसे प्यार मोहब्बत से बात करना ऐसा ना हो कि शक की सुई तुम्हारी तरफ आ जाए

वह जो नई नवेली बहू थी वो बड़ी खुश हुई उसे लगा कि बहुत अच्छी बात है पिता जी ने रास्ता दिखा दिया वो गई और जो उन्होंने पाउडर दिया था उसकी पुड़िया को लेकर के रोजाना से पाउडर थोड़ा थोड़ा खाने में मिलाने लगी सासु मां की सेवा करने लगी प्यार से बात करने लगी अचानक से उस बहू के बिहेवियर में चेंज आ गया था सासू मां को लगा था कि जब भी वह बोलती थी तो सामने से रिजेक्ट नहीं करती थी सासू मां को भी अच्छा लगने लगा था दो-तीन महीनों के बीच में इन दोनों में दोस्ती होने लगी धीरे धीरे धीरे रिश्ता और ज्यादा प्रकाश होने लगा और बहू को लगा कि यह तो बिल्कुल मेरी मां जैसी है 

मां की तरह मुझसे प्यार करती है यह तो मुझे बेटी मानती है वो सिक्स मंथ आने वाला था जब पिता जी ने कहा था कि सासु मां की मौत हो जाएगी यह दवाई असर करेगी दौड़ कर के वह बहू अपने मायके गई और कहा कि पिता जी से बोली की पिताजी कोई ऐसी दवाई दीजिए जिससे कि उस दवाई का असर कम हो जाए तो इसके जो वैद्य पिताजी थे वह हंस के कहने लगे और बोले कि वो दवाई किसी को मारने वाली थी ही नहीं 

मैंने जो तुम्हें पाउडर दिया था वह चूरन हाजमे वाला और मैंने बस तुम्हें इसलिए दिया था कि ताकि तुम्हारी मन को शांत ना मिले तुम्हारी बिहेवियर में चेंज आ जाए घबराओ मत तुम्हारी सासू मां को कुछ नहीं होने वाला और तब जाकर के बहू को अच्छा लगने लगा

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि 

अगर आपको लगे कि लाइफ में सब कुछ आ गया है तो तब भी आप की माता पिता की जरूरत हमेशा रहेगी माता पिता का आशीर्वाद हमेशा साथ लेकर के चलिए  जैसे माताजी हो या पिताजी सास हो या ससुर जी हैं अपनों से बड़ों का सम्मान कीजिए आपकी जीवन में खुशियां जरूर ही आएगी 

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