समस्या का समाधान | Solve The Problem Motivational Story

गुरु जैसा ना आसरा, गुरु जैसा ना मीत।। गुरु कृपा से पाइए, चंचल मन पर जीत।।

एक बार एक किसान अपनी जिंदगी में परेशानियों से परेशान था उसकी जिंदगी में समस्या और समस्याएं आती रहती थी कभी घर में झगड़ा हो जाता था और कभी ज्यादा बारिश हो जाती थी तो कभी कम बारिश हो जाती थी जिसके कारण उसकी खेत का फसल खराब हो जाता था उस समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें उसने कई बार अपने घर में हवन करवाए पूजा करवाई लेकिन समस्या का समाधान नहीं मिल रहा था

एक दिन गांव वालों ने कहा कि भैया पास-ही के एक गांव में ही गौतम बुध आए हैं  इतने जानी-मानी ऋषि है तुम उनके पास जाओ वह तुम्हारी समस्या का समाधान कर देंगे तो किसान को लगा कि गांव वाले कह रहे हैं शायद मेरी समस्या का समाधान हो जाए। मैं चिड़चिड़ा रहता हूं गुस्सा करता हूं शायद ये सब कम हो जाए  तो गौतम बुद्ध के पास जाकर के पहुंचा जा करके प्रणाम किया और बोला की महाराज बड़ी दूर से आया हूं और मुझे मेरे गांव वालों ने जबरदस्ती भेजा है और बोला है कि तुम उनके पास जाओ वह तुम्हारी समस्या का समाधान कर देंगे 

गौतम बुध जी ने पूछा कि बेटा बताओ कि समस्या क्या है तो किसान नहीं बताना शुरू किया कि मैं आपको क्या बताऊं क्या गिनना मेरी जिंदगी में समस्या ही समस्या है कभी-कभी बच्चों से परेशान हो जाता हूं लगता है कि बच्चे नहीं होते तो अच्छा होता कभी बीवी से परेशान हो जाता हूं झगड़ा हो जाता है और लगता है कि यह ना होती तो अच्छा होता कभी मेरी जिंदगी में यह सब समस्या ठीक हो जाती है तो खेत की समस्या आ जाती है वहां पर फसल बर्बाद होने लगती है कभी कम बारिश होती है कभी ज्यादा बारिश होती है ज्यादा बारिश होती है तो फसल बर्बाद हो जाती है कम बारिश होती है तब भी फसल बर्बाद हो जाती है 

किसान समस्या पर समस्या समस्या पर समस्या बताया जाए रहा था बताया जाएगा था तो गौतम बुद्ध चुपचाप सुन रहे थे जो किसान भरा  बैठा था उसने सारी बातें कह दी तो गौतम बुद्ध भी चुप थे किसान भी चुप था किसान इस बात का इंतजार कर रहा था कि शायद अब मुझे समस्या का समाधान मिलेगा और गौतम बुद्ध कुछ नहीं बोल रहे थे और किसान बोलता है कि महाराज मैं आपको प्रणाम करता हूं मैं इतनी दूर से आया हूं मेरी बात का जवाब तो दीजिए आप तो चुपचाप बैठे हैं

तो गौतम बुद्ध ने कहा कि बेटा मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकता और जैसे ही गौतम बुद्ध ने यह कहा वह किसान उन पर भड़कने लग गया कि आप मेरी मदद नहीं कर सकते मुझे मेरे गांव वालों ने जबरदस्ती यहां भेजा है वह गांव वाले बोल रहे हैं कि आप ही मेरी मदद कर सकते हैं और आप बोले हैं कि आप मेरी मदद नहीं कर सकते तो गौतम बुद्ध ने कहा कि बेटा यह तो जिंदगी है जिंदगी का चक्कर है साइकल है जो घूमती रहती है

हमारी जिंदगी में हर किसी के जिंदगी में 83 समस्या होती हैं 83 प्रॉब्लम उन्होंने बोला किसान ने कहा कि 83 समस्या होती हैं मेरी जिंदगी में तो इससे भी ज्यादा है गौतम बुद्ध ने कहा कि वह जो समस्या होती है वह खत्म नहीं हो सकती और उनका कोई समाधान भी नहीं कर सकता तो किसान ने कहा कि मैं फालतू आपके पास आया आपसे अच्छे तो वो पुराने वाले बाबा जी थे उन्होंने घर में यज्ञ करवा दिया हवन करवा दिया पाठ पूजा हो गई 

तो गौतम बुद्ध ने पूछा कि बेटा तुम्हारी समस्या का समाधान मिल गया तो किसान ने कहा कि हां थोड़ी टाइम के लिए सुख शांति रही फिर वही होने लग गया तो गौतम बुद्ध ने कहा कि क्या तुम्हारी समस्या का हमेशा के लिए समाधान मिल गया उसके सामने कहा कि नहीं हमेशा के लिए समाधान नहीं मिला तो गौतम बुद्ध ने कहा कि फिर क्यों बोल रहे हो कि तुम्हें समस्या का समाधान मिल गया मैं तुम्हारी 83 समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता लेकिन तुम्हारी 84 समस्या का समाधान कर सकता हूं तो किसान ने कहा कि 84 कौन सी समस्या है

गौतम बुद्ध ने कहा कि 84 भी जो समस्या है यह है कि तुम सोचते हो कि तुम्हारी जिंदगी में कोई समस्या नहीं होगी जिस दिन तुम यह सोचना बंद कर दोगे कि जिंदगी में समस्या नहीं होगी उस दिन तुम्हारी जिंदगी मैं समस्या अपने आप कम होने लगेगी तुम यह मानते हो प्रॉब्लम है तो एक के बाद एक के बाद प्रॉब्लम बढ़ती चली जाती है तो अगर तुम्हारी जिंदगी में समस्या आ रही है तो वह तो आएगी हर किसी के जिंदगी में सुख दुख आएगा उस दिन गौतम बुद्ध ने उसके किसान को इतनी बड़ी बात समझ कर अपने घर गया और उसके बाद में उसकी जिंदगी बदलने लगी वह शांत रहने लगा वह चीजों को समझने लगा 

इस कहानी से सीख मिलती है कि

हम इसे कई सारे लोग जो थोड़ी सी प्रॉब्लम आती है तो उसका हम हवा बना देते हैं हवा इतना बड़ा बन जाता है कि हम दूसरा वह बनाने से तीसरा वह बना जाती है समस्या तीसरी समस्या पांचवी  समस्या अपने आप हमें नकारात्मक विचार घेर ती रहती है जिस दिन हमने यह मान लिया की समस्या तो आएगी उनसे लड़ने के लिए ऊपर वाला ताकत हमें दे हमारे अंदर वह समर्थ हो बुद्धि हो सकती हो कि हम आगे बढ़े तभी हम आगे बढ़ पाएंगे 

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