सबसे ज्यादा खुश कौन है | Who Is Happiest Motivational Story

तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन नुकसान नहीं पहुंचा सकता, जितना कि तुम्हारे खुद के बुरे विचार।

एक बार एक भिखारी भीख मांगने के लिए किसान के घर के पास पहुंचा तो उसने देखा कि किसानों आए था हाथ पैर धोए था शाम का वक्त था वह खाना खाने के लिए बैठ गया खाना खाते हुए उसके बच्चे वहां पर आ गए अपने बच्चे को किस करने लगा फैमिली बहुत ही अच्छी थी यानी उस वक्त फैमिली टाइम चल रहा था भिकारी यह सब देख रहा था थोड़ी देर तक उसने भी आवाज नहीं लगाई उसे लगा कि अब आवाज लगानी चाहिए उसने आवाज लगाई जो किसान की पत्नी थी हाउसवाइफ उसने आकर के भीख दी भीकारी वहां से निकला बाहर और रास्ते में सोचने लगा कि वो किसान कितना खुश है फैमिली टाइम इंजॉय कर रहा है उसके बीवी हैं बच्चे हैं बच्चे अपने घर में खेल रहे हैं भिकारी  सोचे लगा की असली खुशी तो उस किसान के पास में है बीवी हैं बच्चे हैं बीवी उसके किसान के लिए खाना परोस रही थी भिखारी यह सब सोचकर वहां से चल दिया 

इधर किसान को चिंता होने लगी किसान खाने खाने के बाद में अपनी वाइफ से बोला की लोन चाहिए पैसे चाहिए मुझे समझ नहीं आ रहा था कि पैसे का इंतजाम कहां से करूं पता नहीं अब कैसे होगा तो वाइफ ने कहा हिम्मत करके जाओ जो अपने गांव के साहूकार हैं जो सेठ है जाकर के उनके पास मांगो जो छोटे-सेठ कुछ से कुछ ना कुछ तो मिल ही जाएगा किसान गया अगले दिन रास्ते में सोचने लगा कि पता नहीं लोन मिलेगा या नहीं मिलेगा यह सब सोच सोच कर किसान उस सेठ के घर गया किसान ने उस सेठ से कहा कि महाराज 2000 रुपए मिल जाते अगर तो बीच-बीच खरीद लेताकुछ मदद हो जाती 

साहूकार ने कहा कि ठीक है तुम्हें पैसे दे देते हैं जब साहूकार पैसे निकालने लगा उसके सामने देखा कि वहां पर ₹10000 ₹20000 ₹15000 इस सब का हिसाब किताब जोड़ा जा रहा है किसान जब छोटे साहूकार से पैसे लेकर निकला जो गांव के छोटे सेठ जी थे और किसान सोचने लगा कि यह जो छोटे सेठ जी हैं यह कितने पैसे वैसों की बात करते हैं कहा मैं 2000 के चक्कर में पड़ रहा हूं उनके पास तो 20000 25000 ऐसी देते हैं उसके असली खुशी तो इस छोटे से सीट के पास है और यह कहकर वहां से चला गया अपने घर के और जो साहूकार था उसकी छोटी कपड़े की दुकान थी वह शहर से कपड़े लाकर के गांव में बेचता था उसे कपड़े खरीदने थे तो वह शहर गया और देखा कि वह है सेठ जहां से और कपड़े खरीदता है वह देखा कि यहां पर तो लाखों का हिसाब हो रहा है बहुत सारे तारे आए  हुए थे कोलकाता में है जो 100000 का फायदा हो गया मुंबई में इतने लाख का फायदा हो गया दिल्ली में इतना फायदा हो गया सबके वहां पर तार आए हुए थे यह सब वह देख रहा था वह कपड़े ले कर के उस दुकान से निकल गया गांव की ओर और रास्ते में सोचने लगा यह जो शहर के सेट जी है इनके पास में बहुत सारे पैसा है यह बहुत खुश है 

अब जो यह शहर के सेठ जी थे उनके पास ताल आया हुआ था उसमें लिखा था कि ₹500000 का उनको लॉस हो गया है यह देख करके उनका दिमाग चकरा गया इस सोच के इतने में उनका नौकर आया जो शहर के सेट है राय बहादुर साहब उन्होंने दावत रखी है तो आपको भी नौता दिया है आपको भी जाना है गाड़ी मोटर लगा दी है आप तैयार हुई और चले जाइए दावत में ओ सेठ जी ने मन हल्का किया वह बैठे गाड़ी में और पहुंच गए दावत में वहां जाकर के देखा कि वह बड़ी-बड़ी से सेठ आए हुए हैं कुर्सियां लगी हुई है लेकिन इनको तो कोई पूछ ही नहीं रहा है बैठने के लिए भी जैसे तैसे एक कोई कुर्सी में ले जा कर के वहां बैठे और देखा कि कलेक्टर आ रहे हैं कमिश्नर आ रहे हैं बड़े-बड़े लोग आ रहे हैं राय बहादुर जी से मिलने लाड साहब भी आए हैं उन्होंने भी हाथ मिला खाना-वाना खाए और चले गए यह शहर के सेट जी है वहां से खाना वाना खा कर अपने घर की ओर चल दिए रास्ते में जाते समय सोचने लगे की असली खुशी राय बहादुर जी के पास है राय बहादुर जी के पास तो कलेक्टर आते हैं कमिश्नर आते हैं बड़े-बड़े सेलिब्रिटी आते हैं आकर के इनसे मिलते हैं

इधर तो जो राय बहादुर साहब थे जब सारे लोग चले गए दावत खत्म हो गई तो यह जाकर के कमरे में लेट गए इनकी तबीयत बिगड़ गई थी उनके पास में अचानक से बहुत सारे ताला गए थे कि बहुत जगह पर घाटा हो गया है उन्हें बहुत ही चिंता होने लगी परेशान होने लगे तो नौकरों से बोलने लगे कि यह कोई जिंदगी है इतना बड़ा घाटा हो गया यह हो गया वह हो गया ऊपर से मुझे लाड साहब को पार्टी देनी पड़ती है वह सब बोली रहे थे कि उन्होंने खिड़की से देखा कि एक भिकारी वहां से गाना गाते हुए जा रहा था हाथ में डंडा था मस्ती से चल रहा था यह जो राय बहादुर जी थे उन्होंने कहा अपने नौकरों से असली खुशी जो है भिकारी के पास है मस्ती से जा रहे हैं अपने धुन में जा रहा है वही भिकारी जो किसान को सबसे ज्यादा खुश मान रहा था

इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है

कि हम लोग अपनी जिंदगी में यह देखते हैं कि असली खुशी किसके पास है हम अपनी खुशी को भूल जाते हैं यह कोई नहीं मानता हम एक दूसरे को सुखी मान रहे होते हैं और खुद हम परेशान होते हैं कि मेरे पास ही नहीं है वह नहीं है अगर हमारे पास कुछ भी हो चाहे पैसे हो या नहीं हो हमें जब खुशी होगी तो अंदर से मिलेगी बाहर से नहीं जिंदगी में आप अपनी खुशियों को ढूंढ रहे आप खुश ही रहेंगे 

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